बालकनी


जरा तुम
बालकनी
पर आ जाओ।

फिर हम
कागज़ लपेटे।
फिर हम
पत्थर फेंके।

आजकल के
व्हाट्सएप में
वो मज़ा कहाँ।

- मिश्रा राहुल

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