बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"
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रविवार, 15 फ़रवरी 2015

Love - A Magical Sensation - An Experiment By Maestro Productions



What is Love..??


Everyone has its own answer.. What they feel..?? What they do..?? What they Want..??
How they make up their partner's mood when he/she get angry..??


We, the Maestro Team, ask this questions to public to know their actual views about LOVE..

The Half Coffee (Valentine's Day Special) - A Film by Maestro Productions


This Valentine's Day we're here with Sweet Emotional Short Film
A Story of Two Couples Rohan - Zoya..Half Coffee Justify its way that there is missing someone to take a other Magic Sip..!!
The Most Awaited Romantic Movie is under editing process...Thanks to Maestro Team for their dedication non stop Hardwork to provide you enough entertainment as well Flavored Brilliant Message...!!!
Rest You Watch the Movie...!!!

मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

Ehsaas : Kuch Toh Rehta Hai

Happy Teachers Day : A Film by Maestro Productions



टूटी पेंसिल....पुराने शार्पनर....कलर पेंसिल....चार लाइनर कॉपी....!!
नन्हें हाथो में अनगिनत सपने.....उनको पूरा करने के लिए तैयार एक शख्स पूरी तल्लीनता के साथ...!!!
जब पेंसिल पकड़ अक्षर लिखाते...उनके हाथ में वो नन्हें हाथ समा जाते...दिल में एक विश्वास रहता...गलत रास्तों पर कदम ना भटकने देंगे....

रोक लेंगे....
मार कर... पीट कर...दुलार कर...!!!
चाहे जैसे भी बस....उनके आँखों के सपनों को पहचानते...उन्हे ज़िंदगी के अनुभव बांटते....!!

उन्ही अनुभवों के बीज ऊपर आकार लेने लगते... और एक दिन उस पर मीठे फल लगते....पर तब तक वो शक्स शायद उनके फल चखने के लिए पास ना होता...!!!

____________
हॅप्पी टीचर डे....

- मिश्रा राहुल
(ब्लोगिस्ट एवं लेखक)

शनिवार, 7 जून 2014

ज़िंदगी जरूरी है



सुलझी ही रहती तो ज़िंदगी कैसे होती...
उलझी ही रहती तो बंदगी कैसे होती....!!! 


नाम हथेली मे छुपाए घूमते रहती...
बहकी ही रहती तो सादगी कैसे होती....!!!

चर्चे फैलते जा रहे हर-तरफ मुहल्लों मे...
हलकी ही रहती तो पेशगी कैसे होती....!!!

पसंद तो करते ही हैं तुझे सारे चेहरे....
चुटकी ही रहती तो बानगी कैसे होती...!!!


Poetry & Narration- Misra RaahuL..
Casts- Md. Israr (मोहम्मद इसरार)........VishaaL Mishra (विशाल मिश्रा)
Misra RaahuL (मिश्रा राहुल).........Vikash Shrivastava (विकाश श्रीवास्तव)

©खामोशियाँ-२०१४//मिश्रा राहुल

सोमवार, 2 जून 2014

हर रोज़ यहीं तो आता मैं...



Poetry & Narration :- Misra Raahul
Edited By :- Vishaal Mishra
Camera & Direction :- Misra Raahul & Vishaal Mishra 
Casts:- Misra Raahul & Vishaal Mishra

Poetry:-

एक सोच लिए..
एक ख्वाब लिए.... 
चेहरे पर अलग रुवाब लिए....!!! 
हर रोज़ यहीं तो आता मैं...!!!

ये बादल भी तो बढ़ते है....
फ़लक-सूरज से लड़ते है....!!!
ये रास्ते भी तो चलते है...
गलियों-चौराहो से जुडते है....!!!
उम्मीद लिए....
विश्वास लिए.....
होंठो मे अलग जवाब लिए....
हर रोज़ यहीं तो आता मैं...!!!

सपनों को जो बोते है
चट्टानों पर ही सोते है...
बेखौफ हो के जीते है....
विचलित कभी ना होते है...!!!
तरकीब लिए....
तहज़ीब लिए....
साँसों मे अलग रक़ीब लिए...
हर रोज़ यही तो आता मैं....!!!

बेबाक हो के जलते है,
मुकद्दर लेके चलते है।
बेरोक हो के पलते है,
सिकंदर लेके चलते है।
आगाज लिए...
अंजाम लिए....
लहू मे अलग सैलाब लिए....
हर रोज़ यही तो आता मैं....!!!

ज़िंदगी एक सफर है
कितने भी मील के पत्थर आए
हमे रुकना नहीं है......!!! रुकना नहीं है......!!! रुकना नहीं है......!!!

© Maestro Production Pvt. Ltd.
© खामोशियाँ २०१४