भोर के तारे,सांझ का आलस,रात का सूरज,पतझड़ के भौरे.... ताकते हैं हमेशा एक अजीब बातें जो लोग कहते हो नहीं सकता... चलते राहों पर मंजिल पाने को पैदल चल रहे कदमो में लिपटे धूल की परत... एक अनजाने की तरह उसे धुलने चल दिए...कितनी कशिश थी उस धूल की हमसे लिपटने की...कैसे समझाए वो...मौसम भी बदनुमा था शायद या थोड़ा बेवफा जैसा...एक जाल में था फंसा हर आदमी जाने क्यूँ पता नहीं क्यूँ समझ नहीं पाता इतना सा हकीकत...एक तिनका हैं वो और कुछ भी नहीं...कुछ करना न करना में उसे हवाओं का साथ जरूरी हैं..
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शुक्रवार, 15 मार्च 2013
गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013
अकेली सांझ...!!!
हर सांझ की तन्हाई जाने कितने सवाल अपने अन्दर बसाए रहती....थोड़ी दूर चलते हम...और शायद गली ही रूठ जाती हमसे...रास्ते ही ना होते आगे के...!!!बड़ी अकेली बैठी शाम का दस्तूर हो गया ,
नजरें थी पास पर वो दिल से दूर हो गया .. !!
किसी चाह्दिवारी में सजे झूमरो जैसे,
वो चाँद भी हमारी पहुच से दूर हो गया .. !!
कितने ग़ज़ल दबे उन पीले किताबों में,
गुनाह किया कितने और वो बेकसूर हो गया .. !!
तनहाइयों ने छेड़ दी वो कशिश ज़िन्दगी में ,
मोहरा आएने में झाकने को मजबूर हो गया .. !!
एक अजब सी सवाल आँख मिजाते पूछती सुबह,
तेरा यार जो पास था वो कैसे दूर हो गया .. !!
रविवार, 27 जनवरी 2013
निशान खत्म...!!!
चलते चलते रुक गया एक मुकाम पर...खोज रहा हूँ कुछ पैरो की छाप पर...मिल नहीं रहे वे...मिटा दिया होगा हवायों ने सारे सबूत...अब उन गुनाहगारों खातिर सजा की अर्जी कहा तामिल कराऊ...किससे दरख्वास करूँ मेरी जिल्लतों भरी ज़िन्दगी को सवारने की...!!!
निशाँ खत्म हो गए अब..
यहाँ के बाद...!!!
चप्पल तो हैं मिट्टी सने
और तेरा अक्स भी हैं...
पर निशाँ गायब...!!!
ए आसमां तेरी खैर नहीं...
तूने ही निगला होगा...!!!
लौटा दे ला तुर्रंत...
वरना नोच लूँगा
तेरा चमकीला बटन...!!!
सांझ आने से पहले...
ही बिखर जाएंगे तेरे गौहर...!!!
शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
करवा चौथ स्पेशल...!!!
अर्शे से ना देखा वो भी एक बार झांक आया...कि चाँद फलक पर लटका हैं या नहीं...सही हैं एक प्यास के मारे उचक उचक के देखते ही रहे आज !!!
धूल से धुधली पड़ी शाम की अलसाई किरने ...
उसके इर्द गिर्द पहरा देते कुछ लफंगे अब्र ... !!!
तन्हाई के दामन में चिपके हैं कुछ राज ...
चलनी से देखे तो दिखेंगे वो जख्म चाँद के ... !!
पर शायद आज न आ सकेंगे वो बूढ़े चाचा ...
धुधिया लालटेन थामे चमकाने फलक को ... !!!
रविवार, 14 अक्टूबर 2012
ट्रेन की यात्रा...!!!
सूरज छतरी ताने चल रहा बगल में ,
एक तूफान पर औंधे मुह लिपटी ट्रेन ..
हर मंजर हर जगह पीछे छूट रहे.. !!
बस साथ चल रही वही तन्हाई के अब्र..
कितने अन्शको के सैलाब अपने जिगर में लपेटे ..
टपका रहे हमे ओस की बूंदों में घोलकर .. !!
हौले हौले एक खून से लतपथ लाल साँझ भी ...
डूब रही हैं धीरे धीरे .. !!
और रात भी खामोसी से आ गयी ओढ़ ढाँप के..
कोई शायर खोज रहा धुधिया रौशनी ..
कोई बता दे उसे कि आज अमावस हैं .. !!
वरना खामखा आंखे बिछा कर रखेगा...
पुरानी खटोले पर सोये टकटकी लगाए .. !!
सोमवार, 1 अक्टूबर 2012
चाँद थाल में...!!!
कभी था पर कभी उसे ना पता हैं,
छोटी छोटी बातों में क्यूँ मद खपाता हैं...!!
एक सांझ रोज आती घूँघट काढ़े,
क्यूँ ना तू उसे अपने लिए मनाता हैं..!!!
देख रोज चाँद भटक आता यहाँ पर,
क्यूँ ना तू उस रौशनी में नहाता हैं...!!!
जिंदगी तो ठहरी मजदूर जन्नुम की,
क्यूँ ना तू कटोरे में रोटी प्याज सजाता हैं...!!
बूढी इमली पीछे दुधिया टोर्च थामे रखता,
दिन ठीक हैं वरना यह चाँद भी लडखडाता हैं...!!!
मंगलवार, 18 सितंबर 2012
प्यार का गुल...!!!
गुल सम्हाले रखे हैं बस इन्तेजार हैं उनका,
पलके बिछाए बैठे हैं बस ऐतबार हैं उनका...!!!
हर पल साख से टूटते पत्ते बिखरते धरा पर,
कि दर्द नहीं वो तो बस प्यार हैं उनका...!!!
एक अर्शे से सुनने को तरस गयी जो..
आज चौखट पर खनकता झंकार हैं उनका...!!!
बस यही जिद्द चिपक कर बैठ गयी सांझ,
कि झील में उतरा हुआ ये चाँद है उनका...!!!
हर ज़र्रे में फिसलती हैं प्यास रूह की,
बस आये तो सही कुवां पास हैं उनका...!!!
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