बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"
सांझ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सांझ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

मेला...!!!



साझ बन सँवर
के तैयार...
तारे भी सेंट लगाए
बाहर खड़े ...!!

अब्र ईस्त्री कर
रहा मठमैली कमीज...
मेला लगा
कुछ दूर फ़लक पे...!!

ओहह फटा था कुर्ता
अब्र का शायद...
अठन्नी गायब
कौन ले गया उसको...!!

बच्चे रो रहे
कोई मनाओ उन्हे...
सुबह होने से पहले
वरना कल ना आएंगे...!!

~खामोशियाँ©

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

अकेली सांझ...!!!

हर सांझ की तन्हाई जाने कितने सवाल अपने अन्दर बसाए रहती....थोड़ी दूर चलते हम...और शायद गली ही रूठ जाती हमसे...रास्ते ही ना होते आगे के...!!!
बड़ी अकेली बैठी शाम का दस्तूर हो गया ,
नजरें थी पास पर वो दिल से दूर हो गया .. !!

किसी चाह्दिवारी में सजे झूमरो जैसे,
वो चाँद भी हमारी पहुच से दूर हो गया .. !!

कितने ग़ज़ल दबे उन पीले किताबों में,
गुनाह किया कितने और वो बेकसूर हो गया .. !!

तनहाइयों ने छेड़ दी वो कशिश ज़िन्दगी में ,
मोहरा आएने में झाकने को मजबूर हो गया .. !!

एक अजब सी सवाल आँख मिजाते पूछती सुबह,
तेरा यार जो पास था वो कैसे दूर हो गया .. !!

रविवार, 27 जनवरी 2013

निशान खत्म...!!!

चलते चलते रुक गया एक मुकाम पर...खोज रहा हूँ कुछ पैरो की छाप पर...मिल नहीं रहे वे...मिटा दिया होगा हवायों ने सारे सबूत...अब उन गुनाहगारों खातिर सजा की अर्जी कहा तामिल कराऊ...किससे दरख्वास करूँ मेरी जिल्लतों भरी ज़िन्दगी को सवारने की...!!!

निशाँ खत्म हो गए अब..
यहाँ के बाद...!!!

चप्पल तो हैं मिट्टी सने
और तेरा अक्स भी हैं...
पर निशाँ गायब...!!!

ए आसमां तेरी खैर नहीं...
तूने ही निगला होगा...!!!

लौटा दे ला तुर्रंत...
वरना नोच लूँगा
तेरा चमकीला बटन...!!!

सांझ आने से पहले...
ही बिखर जाएंगे तेरे गौहर...!!!

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

करवा चौथ स्पेशल...!!!

अर्शे से ना देखा वो भी एक बार झांक आया...कि चाँद फलक पर लटका हैं या नहीं...सही हैं एक प्यास के मारे उचक उचक के देखते ही रहे आज !!! 
धूल से धुधली पड़ी शाम की अलसाई किरने ... 
उसके इर्द गिर्द पहरा देते कुछ लफंगे अब्र ... !!! 

तन्हाई के दामन में चिपके हैं कुछ राज ... 
चलनी से देखे तो दिखेंगे वो जख्म चाँद के ... !! 

पर शायद आज न आ सकेंगे वो बूढ़े चाचा ... 
धुधिया लालटेन थामे चमकाने फलक को ... !!!

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

ट्रेन की यात्रा...!!!




सूरज छतरी ताने चल रहा बगल में ,
एक तूफान पर औंधे मुह लिपटी ट्रेन ..
हर मंजर हर जगह पीछे छूट रहे.. !!

बस साथ चल रही वही तन्हाई के अब्र..
कितने अन्शको के सैलाब अपने जिगर में लपेटे ..
टपका रहे हमे ओस की बूंदों में घोलकर .. !!

हौले हौले एक खून से लतपथ लाल साँझ भी ...
डूब रही हैं धीरे धीरे .. !!

और रात भी खामोसी से आ गयी ओढ़ ढाँप के..
कोई शायर खोज रहा धुधिया रौशनी ..
कोई बता दे उसे कि आज अमावस हैं .. !!

वरना खामखा आंखे बिछा कर रखेगा...
पुरानी खटोले पर सोये टकटकी लगाए .. !!

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

चाँद थाल में...!!!


कभी था पर कभी उसे ना पता हैं,
छोटी छोटी बातों में क्यूँ मद खपाता हैं...!!

एक सांझ रोज आती घूँघट काढ़े,
क्यूँ ना तू उसे अपने लिए मनाता हैं..!!!

देख रोज चाँद भटक आता यहाँ पर,
क्यूँ ना तू उस रौशनी में नहाता हैं...!!!

जिंदगी तो ठहरी मजदूर जन्नुम की,
क्यूँ ना तू कटोरे में रोटी प्याज सजाता हैं...!!

बूढी इमली पीछे दुधिया टोर्च थामे रखता,
दिन ठीक हैं वरना यह चाँद भी लडखडाता हैं...!!!

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

प्यार का गुल...!!!


गुल सम्हाले रखे हैं बस इन्तेजार हैं उनका,
पलके बिछाए बैठे हैं बस ऐतबार हैं उनका...!!!


हर पल साख से टूटते पत्ते बिखरते धरा पर,
कि दर्द नहीं वो तो बस प्यार हैं उनका...!!!


एक अर्शे से सुनने को तरस गयी जो..
आज चौखट पर खनकता झंकार हैं उनका...!!!


बस यही जिद्द चिपक कर बैठ गयी सांझ,
कि झील में उतरा हुआ ये चाँद है उनका...!!!


हर ज़र्रे में फिसलती हैं प्यास रूह की,
बस आये तो सही कुवां पास हैं उनका...!!!