भोर के तारे,सांझ का आलस,रात का सूरज,पतझड़ के भौरे.... ताकते हैं हमेशा एक अजीब बातें जो लोग कहते हो नहीं सकता... चलते राहों पर मंजिल पाने को पैदल चल रहे कदमो में लिपटे धूल की परत... एक अनजाने की तरह उसे धुलने चल दिए...कितनी कशिश थी उस धूल की हमसे लिपटने की...कैसे समझाए वो...मौसम भी बदनुमा था शायद या थोड़ा बेवफा जैसा...एक जाल में था फंसा हर आदमी जाने क्यूँ पता नहीं क्यूँ समझ नहीं पाता इतना सा हकीकत...एक तिनका हैं वो और कुछ भी नहीं...कुछ करना न करना में उसे हवाओं का साथ जरूरी हैं..
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बुधवार, 22 मई 2013
रविवार, 31 मार्च 2013
जिंदगी:एक भंवर....लेख...!!!
हम लाख मन्नते कर ले किसी अन्य को अपने उस संसार की ऊष्मा में जलाने में पर हम उन्हें
उससे परिचित नहीं करा सकते....उसके दुःख, पीड़ा, ख़ुशी, भावनाएं केवल अपने दायरे तक ही नियत रहती हैं ...हमारे अपने लिए होती हैं वो अजब दुनिया... दूसरों के लिए वह एक विचित्र अलग संसार जैसा हैं...वह उसके बारे में जान सकता है, पढ़ सकता है, सुन सकता है... परन्तु उसे महसूस कतई नहीं कर सकता...!!
ठीक ये बात उसी तरह होती जैसे हम छोटे थे ... हमारे बाबूजी बताते थे की हम लाखो मंदाकिनियों में विलीन हैं और उनमे से सिर्फ एक मन्दाकिनी में हम रहते .... और सूरज चाँद धरती आकाश आग पानी...सब सब इस परिवेश तलक ही हैं..दूसरी दुनिया में कुछ भी नहीं ...सिर्फ धुंध से धुधली तस्वीरे हैं ...जो दिखती नहीं इन नाजुक आँखों से..!!!
आज पता चला शायद वो सही थे...!!
~खामोशियाँ©
~खामोशियाँ©
बुधवार, 13 मार्च 2013
ख्वाब...!!!
ख्वाब परिंदा ठहरा...
बड़ी आराम से...!!!
उड़ रहा ख्वाइशों के
नीले बैक्ग्राउण्ड मे...!!!
अचानक टकरा गया...
टूट गए पर उसके...!!!
छन्न से बिखर गयी...
मानो सारी कायनात...!!
ओह रूई के गोले...
रंगीन बनते जा रहे...!!!
सूरज पीला मरहम लिए
चाँद ढूढ़िया टॉर्च थामे...!!!
सभी आए हॉस्पिटल मे...
पर कमी हैं किसी की...!!!
मुकद्दर की गाड़ी पंचर हैं...
उसे कोई बुला लाओ...!!!
शनिवार, 9 मार्च 2013
रविवार, 24 फ़रवरी 2013
ऑस्कर पिस्टोरियस" और "लांस आर्मस्ट्रांग"
ऑस्कर पिस्टोरियस" और "लांस आर्मस्ट्रांग" दोनों से हमारा काफी गहरा जुडाव था...दोनों खेल के रत्न थे...पर जिंदगी की कसौटी को खेल की बुनियाद कहा तक सम्हालेगी...!!!बड़ी भोर में अकेले निकल गया...
आदर्श और उनके पदचिन्हों को पकड़ के चलने की परंपरा अब लगता हैं खत्म कर देनी चाहिए...जब आइकॉन ही ऐसे करतूत करेंगे तो...आम आदमी से क्या अपेक्षा की जाए...!!!
मैं भला आदमी ढूढने..!!!
कौन मदद करे मेरी...
सूरज आँख मीज रहा...
सितारे सामान सैन्हार रहे...!!!
बुधवार, 20 फ़रवरी 2013
गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013
इलाहबाद कुम्भ मेला...!!!!
त्रिवेणी के तट पर बैठा जाने कितने एहसास को अपने में लिए जा रहा हूँ...कुछ शाम की चमक हैं...साजो सजावट हैं...लोग हैं हाँ मुकुट धारी...!!!फरवरी के चौदह तारीख...
उड़ेल रही अपनी चमक...!!!
बीहड़ो को काटते बड़ी मस्ती से...
बहती आ रही जमुना भी...
गले लगाने को आतुर संगम पर...!!!
पश्चिम की ओर बैठा सूरज...
मुहर लगा रहा सबके उपस्थिति की...!!!
कोई छुप के देख रहा बिना आये...
गंगा घुल रही जमुना में...!!!
सरस्वती मौन हैं साबुन लिए...
धुल रही सभी के पाप ...!!!
नैनी का पुल भी पहन लिया...
नयी आवरण देख मटक रहा...!!!
अकबर का किला सब कुछ साक्षी हैं इन त्रिवेदियों की हर एक कल-कल का...पूछ लेना बाद में सब कुछ हु-ब-हु बताएगा ये....सच कह रहा आज याद आ गए कुछ और पंक्तियाँ...जन कवि कैलाश गौतम की...!!!
"याद किसी की मेरे संग वैसे ही रहती हैं...
जैसे कोई नदी किसी किले से सटकर बहती हैं...!!!"
बुधवार, 2 जनवरी 2013
गुरुवार, 20 दिसंबर 2012
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
कोहरे की रजाई...!!!
कोहरे की रजाई में लिपटी...
सुबह भी आज कुछ अलसाई हैं...!!!
बड़ी देरी से सोकर उठा सूरज भी...
उसकी चमक अभी तक...
खिड़कियों के दरक्तों में मौजूद हैं...!!!
सुबह भी आज कुछ अलसाई हैं...!!!
बड़ी देरी से सोकर उठा सूरज भी...
उसकी चमक अभी तक...
खिड़कियों के दरक्तों में मौजूद हैं...!!!
बुधवार, 17 अक्टूबर 2012
सूरज का जन्मदिवस .. !!!
सबके जनम दिवस पर बधाइयां लिखते लिखते यूँ ही सोचने लगा की अगर सूरज जन्मदिन मनाये तो उसमे आखिर क्या...कमी रह जाएगी...उसे बता नहीं सकता बस लिख सकता हूँ भावनाओं की आवा पोह को जेहन में से ... !!!
हवाओं ने फुक मारा के फूल गया गुब्बारा..
बाँध दिया उसके सिरे को पहाड़ों के टीलों से ..!!
बड़े ख़ुशी से उड़ते अब्र उसकी मांघ झाड रहे ..
पक्षी भी चल दिए लोगों को न्योता बाटने ..
चमकती बिजली लिए तैयार बर्फ का केक काटने को .. !!
कोई अकेले बैठा था मुरझाये एक कोने में ..
पर मना न सकता कोई उसको आने खातिर .. !!
उसके आते पिन लग जाएगी गुब्बारे में ...
निशा ओह्ह निशा मुमकिन नहीं बुलाना .. !!
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