Receive all updates via Facebook. Just Click the Like Button Below...

Get this Here

अपनी खामोशियाँ खोजे

Google+ Followers


बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

समर्थक

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

एक बुजुर्ग आइना....



पुराने स्टोर रूम में बिफरा पड़ा था...
एक बुजुर्ग आइना...
मिट्टी सनी दाहिने हाथ की बुसट में...!!

बड़ी नर्म कलाइयों से झाड़ रहा...
पानी गिर रहा अन्दर ही मेरी अक्स से...
रो तो न रहा मैं...बाहर से...!!

साफ़ कर दिया...कुंडी में फंसे कपडे से..
उठा लाया उसे एक झूठ तामिल कराने...!!

रोज झांकता उसमे कितनी खुदगर्जी से..
पर देख बुढ़ापे में भी कितना
साफ़ देखता..वो बुजुर्ग आइना...!!
Comment With:
OR
The Choice is Yours!

कोई टिप्पणी नहीं: