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बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

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मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

ठण्ड की वापसी....!!!


काफी दिनों बाद आज फिर कलम में रिफिल भरा दी...और टेस्ट चेक खातिर दुकान पर ही उतार दिया चंद अल्फाज...दुकानदार बाबू कह रहे थे राहुल ठण्ड गयी अब ऐश करो...हमने भी मुंडी हिला दिया...और छाप दिया कुछ पल दिमाग इतर बितर कर रहे थे...!!!!


वापसी की तैयारी में...
ठण्ड समेट रही संन्दूक...!!!

कुछ उधारी हैं...
कुछ बकाया भी...!!!

कोपले छुपाए बैठी हैं...
गौहर ओस के...!!!

बचाना कही रो ना दे..
वर्ना छींटा जाएंगे...!!!

लौटा सड़को के चश्मे
जिन्हें छीना था तूने...!!!

रूठे चाँद को भी मना...
तेरी करतूत से खफा हैं...!!!

धरा की भी सुन ले...
मफलर बाँध लेना...!!!

अब जा ट्रेन आ गयी ...
वरना देरी हो जाएगी...!!!
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