बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

सोमवार, 25 मार्च 2013

ईमानदारी का कुर्ता...!!


कितने वादो
का ख्याल किया...
वक़्त मोह का
चश्मा निकाल दिया...!!

आसरा पाला
टूटा फूटा सा...
लोगो ने उससे
भी सवाल किया...!!

ईमानदारी का
कुर्ता पड़ा खूटी पे...
बेईमानो ने उसका
क्या हाल किया...!!

जो नहीं पास
वो ताउम्र आया नहीं...
जो था उसका...
भी जीना मुहाल किया...!!

~खामोशियाँ©

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