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बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

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गुरुवार, 13 मार्च 2014

रंग की दुनिया


मत-भेद कहाँ है रंगो मे.....
लिपटा रहता है अंगो मे.....!!!

दूर-दराज़ को पास बुला के....
चलता रहता है संगो मे.....!!!

जात-पात की आग भुला के....
मिलता रहता है पंगो मे.....!!

काबे-काशी को गले लगा के ....
लुटता रहता है दंगो मे....!!

श्वेत-श्याम का भेद मिटा के....
घुलता रहता है जंगों मे....!!!

©खामोशियाँ-2014
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