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बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

चुनाव


चुनाव एक पहेली है....कौन कहता सहेली है....
रोज़ चले आते दौड़े.....पैसों की होती होली है....!!!

नाम पुकारते पुचकार के....
दान दिलाते बड़े प्यार से....
अन्न खत्म हो जाता जब....
थाल सजाते बड़े प्यार से....!!!

मौसम की चाय कहाँ छनती...
कॉफी पिलाते इतमिनान से....
गाँव-शहर तब एक सा लगता...
बिजली रुकती स्वाभिमान से....!!!

रोज़ खड़ी रहती बन-ठन के..
वो गाँव की पहली ड्योढ़ी है....!!!

चुनाव एक पहेली है....कौन कहता सहेली है...
रोज़ चले आते दौड़े.....पैसों की होती होली है....!!!

कुशाशन खाट पे लेटा...
आग सेंकती छोरी है....
बड़े-बूढ़े सब जुगत मे रहते...
सड़क चमकती गोरी है...!!!

दुशाशन साड़ी बंटवाता....
कृष्ण यहाँ की चोरी है...
वक़्त बेवक्त शक्ल बदलता
गद्दी की छोरा-छोरी है....!!

चुनावी वादे सबको लुभाते....
आँखों मे बस्ती लोरी है....!!

चुनाव एक पहेली है....कौन कहता सहेली है...
रोज़ चले आते दौड़े.....पैसों की होती होली है....!!!

©खामोशियाँ-२०१४  
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