सफर


हर सफर मे
कितने कब्र फोड़
निकाल लेते दोनों मसीहों को....!!!

हथेलियों से रगड़
मुंह की फूँक से
उनके कपड़े उतार डालते...!!!

कुछ को
बड़ी बेरहमी से
जख्म पर नमक छिड़क
मुंह मे ड़ाल बारीकी से पीस देते....!!!

तो औरों के
गले घोंटकर
पूरे शरीर का तेल
बड़ी आसानी से निचोड़ डालते....!!!

आज भी उनकी
चीखे मौजूद है उन पटरियों पर
लाश भी मौजूद टुकड़ो मे बटीं....!!!

कल आएगा
झाड़ू मार निकालेगा हर बोगी से
फिर सिनाख्त होगी....
किसके घर का दीपक बुझा....!!!

(मूँगफली के संदर्भ मे पर आजकल की ट्रेनो की भारी भीड़ देखकर ये व्यक्तियों से अलग नहीं लगता....दोनों पीसे ही जाते बिलकुल एक जैसे)

©खामोशियाँ-२०१४

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (30-01-2014) को बसंत की छटा ( चर्चा - 1507 ) में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. अब तो मूंगफली खाते समय डर सा लगेगा..

    जवाब देंहटाएं
  3. लाजवाब बिम्ब से जोड़ा है जीवन की हकीकत को ...

    जवाब देंहटाएं
  4. Bahut gehri aur sadhi hui rachna..kya kahna...bahut achhe Bhai!

    जवाब देंहटाएं

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