बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

सोमवार, 9 जून 2014

बदलती ज़िंदगी



बदल रहा मौसम 
अब कुछ होने को है,
जो हुआ था कभी 
अब फिर होने को है।

यादें ठहरी कहाँ 
कुलाचे मार रही अब,
जिंदगी सारी हदें 
फिर पार करने को है।

पलकों की छांव में 
सपनों को बिठलाए,
ये मन एक बार फिर
फलक छूने को है।

©खामोशियाँ-२०१४

शनिवार, 7 जून 2014

Icecream ज़िंदगी


ज़िंदगी
ice-cream के टुकड़े जैसी होती।
चाकू से काट, छोटे-बड़े
प्लेट मे सजाती रहती।

रंग बिरंगी,
अलग-अलग flavour।

मानो!!
तेवर ओढ़ रखे हो
vanila थोड़ा शांत,
strawberry बहुत गंभीर,
Butterscotch जरा गुस्सैल।

जुबान पर
ठहरती भी बस उतनी ही देर,
जीतने में इंसान मुखौटे बदलता।

©खामोशियाँ-२०१४ // मिश्रा राहुल

ज़िंदगी जरूरी है



सुलझी ही रहती तो ज़िंदगी कैसे होती...
उलझी ही रहती तो बंदगी कैसे होती....!!! 


नाम हथेली मे छुपाए घूमते रहती...
बहकी ही रहती तो सादगी कैसे होती....!!!

चर्चे फैलते जा रहे हर-तरफ मुहल्लों मे...
हलकी ही रहती तो पेशगी कैसे होती....!!!

पसंद तो करते ही हैं तुझे सारे चेहरे....
चुटकी ही रहती तो बानगी कैसे होती...!!!


Poetry & Narration- Misra RaahuL..
Casts- Md. Israr (मोहम्मद इसरार)........VishaaL Mishra (विशाल मिश्रा)
Misra RaahuL (मिश्रा राहुल).........Vikash Shrivastava (विकाश श्रीवास्तव)

©खामोशियाँ-२०१४//मिश्रा राहुल

सोमवार, 2 जून 2014

एक नज़रिया


©खामोशियाँ-२०१४//मिश्रा राहुल   

हर रोज़ यहीं तो आता मैं...



Poetry & Narration :- Misra Raahul
Edited By :- Vishaal Mishra
Camera & Direction :- Misra Raahul & Vishaal Mishra 
Casts:- Misra Raahul & Vishaal Mishra

Poetry:-

एक सोच लिए..
एक ख्वाब लिए.... 
चेहरे पर अलग रुवाब लिए....!!! 
हर रोज़ यहीं तो आता मैं...!!!

ये बादल भी तो बढ़ते है....
फ़लक-सूरज से लड़ते है....!!!
ये रास्ते भी तो चलते है...
गलियों-चौराहो से जुडते है....!!!
उम्मीद लिए....
विश्वास लिए.....
होंठो मे अलग जवाब लिए....
हर रोज़ यहीं तो आता मैं...!!!

सपनों को जो बोते है
चट्टानों पर ही सोते है...
बेखौफ हो के जीते है....
विचलित कभी ना होते है...!!!
तरकीब लिए....
तहज़ीब लिए....
साँसों मे अलग रक़ीब लिए...
हर रोज़ यही तो आता मैं....!!!

बेबाक हो के जलते है,
मुकद्दर लेके चलते है।
बेरोक हो के पलते है,
सिकंदर लेके चलते है।
आगाज लिए...
अंजाम लिए....
लहू मे अलग सैलाब लिए....
हर रोज़ यही तो आता मैं....!!!

ज़िंदगी एक सफर है
कितने भी मील के पत्थर आए
हमे रुकना नहीं है......!!! रुकना नहीं है......!!! रुकना नहीं है......!!!

© Maestro Production Pvt. Ltd.
© खामोशियाँ २०१४