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अपनी खामोशियाँ खोजे

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बड़ी खामोसी से बैठे हैं फूलो के धरौदे....जरा पूछ बतलाएंगे सारी गुस्ताखिया....!!!______ प्यासे गले में उतर आती....देख कैसे यादों की हिचकियाँ....!!!______ पलके उचका के हम भी सोते हैं ए राहुल....पर ख्वाब हैं की उन पर अटकते ही नहीं....!!!______ आईने में आइना तलाशने चला था मैं देख....कैसे पहुचता मंजिल तो दूसरी कायनात में मिलती....!!! धुप में धुएं की धुधली महक को महसूस करते हुए....जाने कितने काएनात में छान के लौट चूका हूँ मैं....!!!______बर्बादी का जखीरा पाले बैठी हैं मेरी जिंदगी....अब और कितना बर्बाद कर पाएगा तू बता मौला....!!!______ सितारे गर्दिशों में पनपे तो कुछ न होता दोस्त....कभी ये बात जाके अमावास के चाँद से पूछ लो....!!!______"

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शुक्रवार, 19 मई 2017

दो शब्द अभिभावकों से।

कुछ दिनों में आपके बेटे/बेटियों के रिजल्ट्स आने वाले होंगे। यदि आपके बच्चो के मार्क्स, पडोसी के बच्चे से कम भी आए तो प्लीज उनको परेशान मत करिएगा।
ज़िन्दगी बहुत बड़ी है और मौके अपार है। वो कुछ भी बन सकता। हाँ सही सुना आपने कुछ भी।
और यह भी सही है उस कुछ भी में कभी उसके बोर्ड परीक्षा में आए अंको का लेना देना नहीं होगा।
जैसे आपकी बिटिया अच्छी आर्टिस्ट बन सकती, जिसके लिए उसके गणित के नंबर अच्छे पाने की आवश्यकता नहीं। क्या आप जानते है मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन इंटरमीडिएट बोर्ड के गणित में कितने अंक हासिल किये थे।
ठीक उसी तरह आपका बेटे क्रिकेटर बन सकता जहां उसके इतिहास के अंकों का ख़ास महत्त्व नहीं होगा।
ज़रा अपने और सोसाइटी के बंधनो से खुद को मुक्त करके सोचिये। परंपरा को तोड़िये। खोजिए वो खूबी जो ईश्वर नें आपके बेटे में जन्म से दे रखी है।
सोचियेगा | समझियेगा
- मिश्रा राहुल
(ब्लॉगिस्ट व लेखक)

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