भोर के तारे,सांझ का आलस,रात का सूरज,पतझड़ के भौरे.... ताकते हैं हमेशा एक अजीब बातें जो लोग कहते हो नहीं सकता... चलते राहों पर मंजिल पाने को पैदल चल रहे कदमो में लिपटे धूल की परत... एक अनजाने की तरह उसे धुलने चल दिए...कितनी कशिश थी उस धूल की हमसे लिपटने की...कैसे समझाए वो...मौसम भी बदनुमा था शायद या थोड़ा बेवफा जैसा...एक जाल में था फंसा हर आदमी जाने क्यूँ पता नहीं क्यूँ समझ नहीं पाता इतना सा हकीकत...एक तिनका हैं वो और कुछ भी नहीं...कुछ करना न करना में उसे हवाओं का साथ जरूरी हैं..
मंगलवार, 9 अप्रैल 2013
शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013
गुरुवार, 4 अप्रैल 2013
बुधवार, 3 अप्रैल 2013
पीटी लाइन...
एक
कड़कती धूप मे
कतार लगाए कितने खंभे...!!
सभी
के बंधे हैं सिरहाने
दोनों हाथ ऊपर ताने खड़े...!!
ओह
पीटी लाइन लगी
शनिवार ही रहता यहाँ रोज...!!
~खामोशियाँ©
मंगलवार, 2 अप्रैल 2013
गमो का जन्मदिन...
एक खाली
पड़े मकान से
जाने कितनी बार बात हुई...
कई रात
दोनों साथ काटें
सिरहाने तक लगवाए साथ...
रात मे
दियासलाई मार के
कितने अँधेरों को भगाए साथ...
देख आगन
पर कैसे टॉर्च
मार दोनों की तलाशी ले रहा अब्र...
बयार भी
दरवाजे पर कुंडी
पकड़ झूलती नजर आ रही...
सम्मे चिपके
कान लगाए चाह
रहे सुनना हम लोगों की फूस-फूस...
अब खोल
भी दे देख दरीचों
तलक आ पहुचे जुगनू रोते रोते...
देख अब
कहा तू अकेला
सब तो हैं चल आज माना ही ले...
... गमो का जन्मदिन...
सोमवार, 1 अप्रैल 2013
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सारे एक ही जैसे कितने...... ....लेटे हैं एक बगल एक.... एक बड़ा ताबूत सा है..... .....जिसके अगल-बगल ऊंची-नीची पेंटिंग सजाई हैं....!!! बचत...






